मैं एक जवान हूँ
तपती धूप की छाया में, खड़ा हूँ मैं डटकर,
जान दे दूंगा मैं जान कर, भुला न देना तुम रो कर|
है सुना अकसर ये मैंने, कुछ दिनों का मेहमान हूँ,
प्राण का मुझे डर नही, क्योंकि मैं एक जवान हूँ|
पैदा हुआ इस मिट्टी में , कर्ज़ इसका चुका जाऊंगा,
समा कर मैं इस धरती में, फ़र्ज़ अपना निभा जाऊंगा|
समा कर मैं इस धरती में, फ़र्ज़ अपना निभा जाऊंगा|
भूल न जाना तुम बस मुझको, मैं इस देश की शान हूँ,
डर लगता है बस राजनीति से,क्योंकि मैं एक जवान हूँ|
काट लो तुम सिर ये मेरा,सिर को नही झुकने दूंगा,
चंदन की तरह मर के भी मैं, खुसबू अपनी छोड़ दूँगा|
खून की दलाली कहने वालों, मैं इस देश का मेहरबान हूँ,
छोड़ दो मुझे ओ राजनीति करने वालों, मैं बस एक जवान हूँ|
देश को अपने मैं भीतर से,यूँ ना बाटने दूंगा,
चाहे पत्थर से मारो तुम मुझेको, पर तुमको मैं ना मारने दूंगा।
जीवन मेरा, मरण भी मेरा , भारत माँ पे करता कुर्बान हूँ,
बहा कर आंसू भूल ना जाना,मैं तो बस एक जवान हूँ।
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