विश्वास
निकल पड़ा है तु , तुझे किस की तलाश है ,
तेरे खुद के होने का क्या तुझे आभास है ,
राहों में मिले ठोकर का क्या तुझे जरा भी एहसास है ,
उड़ जाएगा तुझे, अगर खुद पे तुझे विश्वास है ।
डरता क्यों है तु , बता क्यों तु भयभीत है ,
ख्वाब तेरे बन के शोले अन्दर अभी भी जीवित है ,
हुई पश्चात् ग़लतियों से मैं आज भी शर्मिंदा हुँ ,
पर वही जलाती है ज्वाला भीतर मेरे की मैं आज भी जिंदा हुँ ।
किस्मत को जिदंगी के हर मोड़ पर तुने हराया है ,
कि हुई भविष्यवाणी को तुने हमेशा झुठलाया है ,
हुई हर इंतिहा में तुने अच्छा कर दिखलाया है ,
पर वो मनहूस रात ही थी जिसने तुझे अक्सर रुलाया है ।
चल बढ़ा कदम तु ,तुझे मिला उस खुदा का इशारा है ,
तुने ही तो ख़्वाबों को पलकों पे बिछा के सहारा है ,
नजर उठा कर देख सितारों की तरफ , उन्होंने तुझे पुकारा है ,
बढ़ेगा कामयाबी की ओर तु , क्योंकि आने वाला वक्त तुम्हारा है ।
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